निर्माण में बाधा का विकल्प तलाशेगी इंजीनियरों की टीम, आज होगा रूट का निरीक्षण

गोरखपुर (जयप्रकाश यादव)
निर्माण में बाधा का विकल्प तलाशेगी इंजीनियरों की टीम, आज होगा रूट का निरीक्षणमेट्रो निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए गोरखपुर में दो दिन तक गहन मंथन होगा। इसके लिए गुरुवार को लखनऊ से अधिकारी आ रहे हैं, जो स्थानीय संबंधित इंजीनियरों के साथ विचार-विमर्श कर निर्माण में आ रही बाधाओं के विकल्प तलाशेंगे। इस दौरान मेट्रो निर्माण की अंतिम रिपोर्ट भी तैयार कर ली जाएगी।*लखनऊ से आज आएंगे यह अधिकारी*गुरुवार को लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन (एलएमआरसी) के निदेशक कुमार केशव और मुख्य अभियंता रवि जैन गोरखपुर आ रहे हैं। दोनों अधिकारी, जीडीए, एनएच और लोक निर्माण के अभियंताओं के साथ मेट्रो के रूट का गहन निरीक्षण करेंगे।*प्रमुख सचिव आवास भी आएंगे गोरखपुर*दूसरे दिन शुक्रवार को प्रदेश के प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन दीपक कुमार गोरखपुर आएंगे। इस दौरान वह मेट्रो रूट का निरीक्षण कर निर्माण से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान निकालेंगे। एलएमआरसी के निदेशक के अलावा जीडीए, एनएच और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर भी अपने सुझाव देंगे। गहन विचार-विमर्श के बाद विकल्प तैयार किया जाएगा।*यह है मेट्रो की राह की बाधा*दरअसल, मेट्रो के एक रूट पर श्याम नगर और दिव्यनगर के बीच जंगल कौडिय़ा-मोहद्दीपुर फोरलेन का निर्माण हो रहा है। मोहद्दीपुर से गुरुंग तिराहे तक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि गुरुंग तिराहे से सूबा बाजार तक फोरलेन का निर्माण कार्य जारी है। गोरखपुर मेट्रो पिलर पर दौड़ेगी। पिलर की चौड़ाई लगभग दो मीटर होगी, लेकिन उसकी बुनियाद के लिए करीब छह मीटर जगह चाहिए। प्रत्येक पिलर के बीच 27 मीटर की दूरी प्रस्तावित है। ऐसे में फोरलेन बन जाने के बाद पिलर के निर्माण में दिक्कत आएगी। ऐसे में इंजीनियर्स विकल्पों को तलाशेंगे जिससे फोरलेन का निर्माण भी हो जाए और मेट्रो के पिलर भी बिना बाधा के तैयार हो जाएं।*यह है विकल्‍प*विभागीय जानकारों का कहना है कि फिलहाल दो विकल्पों पर विचार चल रहा है। पहला यह कि मेट्रो के पिलर तैयार होने तक फोरलेन का निर्माण रोक दिया जाए। दूसरा, जहां पिलर बनने हैं, वहां अस्थाई रूप से कम तारकोल की सड़क बना दी जाए। खैर विकल्प जो भी हो, दो दिन में मेट्रो निर्माण की अंतिम रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी। कैबिनेट में पास कराने के बाद उसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।*केंद्र से हरी झंडी के बाद शुरू होगा कार्य*केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। 4100 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना में दो कॉरिडोर बनाए जाएंगे। दोनों कॉरिडोर पर 27 स्टेशन होंगे। दो बोगी की मेट्रो में एक साथ चार सौ लोग यात्रा कर सकेंगे

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