झलकारी बाई प्रतिमा पुष्प किए गए अर्पित

मुकेश शर्मा

रायबरेली (संज्ञान न्यूज़ )वीरांगना झलकारी बाई के 164वें शहादत दिवस पर उनके अनुयायियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला तथा उनके जन्मदिन या पुण्यतिथि पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग की। वीरांगना झलकारी बाई कल्याण विकास परिषद के तत्वाधान में 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन की महान वीरांगना माता झलकारी बाई कोरी का 164वां शहादत दिवस सादगी पूर्ण ढंग से मनाया गया। उल्लेखनीय है कि उनके अनुयायियों ने सुबह रायबरेली के गोल चौराहा स्थित झलकारी बाई प्रतिमा स्थल पर उपस्थित होकर पुष्पांजलि अर्पित किया और उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम का संचालन करते हुए परिषद के अध्यक्ष राम सजीवन धीमान ने कहा कि उनका कद और पद राष्ट्रीय स्तर का है।

इसलिए उनके जन्मदिन 22 नवंबर या पुण्यतिथि 5 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। परिषद के महासचिव गुप्तार वर्मा ने मांग की कि उनके नाम पर सड़कों, चौराहों, तिराहों और संस्थानों का नामकरण किया जाए। सामाजिक चिंतक सुनील दत्त ने अपने संबोधन में कहा कि उनके जीवन चरित्र को जूनियर हाईस्कूल स्तर के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए तथा उनके नाम पर स्मारकों और पार्कों का नामकरण किया जाए।
विश्व दलित परिषद के राजेश कुरील और परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष राम समुझ लाल ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी से 4 कोस दूर भोजला गांव में हुआ था। उन्होंने प्रण किया था कि जब तक मैं झांसी को अंग्रेजों से आजाद नहीं करा दूंगी तब तक माथे पर सिंदूर नहीं लगाऊंगी। उन्होंने अपने जीते जी झांसी को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त रखा। अंग्रेजों से मुकाबला करते हुए 5 अप्रैल 1858 को पति पूरन कोरी के साथ वीरगति को प्राप्त हुई थी। उन्होंने अपनी वीरता और बहादुरी के बल पर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिया था।
इस अवसर पर मोहनलाल, रमेश वर्मा, सियाराम वर्मा, श्यामलाल, सभासद एसपी सिंह, रमेश कुमार, इंजीनियर वंश बहादुर यादव, अमरनाथ, रतीपाल, अजय कुमार, दीनानाथ, रिंकू गुप्ता, प्रमोद कुमार, अतुल वर्मा, संदीप शर्मा, बुद्धि लाल आदि लोग उपस्थित रहे।

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