खीरी में ड्रोन से शुरू हुआ फसलों पर नैनो यूरिया छिड़काव

गन्ना विकास व डीसीएम अजबापुर ने मिलकर शुरू की गन्ने की खेती को तकनीक से जोड़ने की पहल

प्रांजल श्रीवास्तव

लखीमपुर खीरी (संज्ञान न्यूज़)। केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए उनकी आय में वृद्धि करने के पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। अपर मुख्य सचिव (गन्ना) संजय भूसरेड्डी की प्रेरणा, डीएम महेंद्र बहादुर सिंह के मार्गदर्शन में जनपद खीरी में गन्ने की खेती को तकनीकी से जोड़ने की जरूरत डीसीएम श्रीराम समूह अजबापुर इकाई व गन्ना विकास विभाग लखीमपुर ने महसूस की। गन्ने की खेती के समग्र विकास व तकनीकि के इस्तेमाल की कड़ी में ड्रोन से नैनो यूरिया, एनपीके के साथ-साथ सूक्षम तत्वो का पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) वृहद स्तर पर शुरू किया।

इससे कम समय में अधिक रकबा, गन्ने की खड़ी़े फसल में आसानी से छिड़काव व अधिक प्रभावकारी छिड़काव होता है। इकाई प्रमुख पंकज सिंह ने बताया की ड्रोन आटोमैटिक व सामान्य मोड पर रिमोट से संचालित मानव रहित विमान है, जिसे दूर से ही नियन्त्रित तरीके से उड़ाया जा सकता है। ड्रोन की क्षमता 10 लीटर पानी की है, जिसमें आवश्यकतानुसार कीटनाशक या यूरिया मिलाकर 5 से 7 मिनट में लगभग 10 लीटर के घोल से एक एकड़ खेत पर छिड़काव मात्र रू. 400/- प्रति एकड़ में कराया जा रहा। इससे जहां एक ओर छिड़काव में लेबर व समय की बचत होती है वही दूसरी ओर इसका प्रभाव अधिक होने से उपज में बढ़ोत्तरी होती है।

चीनी मिल ने क्षेत्र में ड्रोन के जरिए एक हजार एकड़ पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) का लक्ष्य रखा। कृषको को अधिक लाभ व उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान आकृष्ट करते हुये अनुरोध किया की गन्ने की फसल में 10 किग्रा प्रति एकड़ की दर से यूरिया कि द्वितीय खुराक डालने, पेड़ी प्रबन्धन को सुदृढ़ बनानेेे, गन्ने की उपज में बढोत्तरी व तकनीकी खेती को बढ़ावा देना अत्यन्त आवश्यक है। इस समय गन्ने की फसल में चोटी बेधक/टॉपबोर्र एवं अंकुर बेधक/अर्ली शूटबोर्र के बढ़तेे प्रकोप एवं फसल सुरक्षा के लिए जरूरी है कि गन्ने की जड़ो के नजदीक कोराजन घोल की ड्रेचिंग की जाये तथा सम्पूर्ण खेत में दवा प्रयोग करने के बाद अगले 24 घंटे के अन्दर खेत की सिंचाई कर दें। यदि पौधो में टॉपबोर्र दिखाई देता है तो पतली व धारदार खुरपी की सहायता से जमीन की सतह से कटाई कर दिया जाये, जिससे इसकी दूसरी एवं तीसरी पीढ़ी के प्रकोप को रोका जा सके।

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