बेंच में महिलाएं : मद्रास हाईकोर्ट 13 महिला न्यायाधीशों के साथ पहले नंबर पर, पांच हाईकोर्ट में कोई महिला जज नहीं

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा हाल ही में कई हाईकोर्ट में न्यायिक नियुक्तियों के लिए अपनी सिफारिशें करने के साथ भारतीय न्यायपालिका में जेंडर रेशो एक बार फिर जांच के दायरे में आ गया है। कुछ साल पहले, इंडिया जस्टिस रिपोर्ट ने इसकी एक निराशाजनक तस्वीर उजागर की थी, जिसमें महिलाओं के प्रतिनिधित्व को अपर्याप्त’ बताया गया था। विशेष रूप से अधीनस्थों की तुलना में उच्च न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रहा।

चूंकि कॉलेजियम ने इस महीने की शुरुआत में न्यायिक नियुक्तियों के लिए कुछ प्रस्तावों को अधिसूचित किया था, इसलिए यह हाईकोर्ट में महिला न्यायाधीशों के प्रतिनिधित्व का निरीक्षण करने का उपयुक्त समय है। इस संदर्भ में यह पाया गया कि मद्रास हाईकोर्ट 13 महिला न्यायाधीशों के साथ आगे चल रहा है। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट में 11 महिला जज हैं (नई अधिसूचित नियुक्तियों सहित)।

तेलंगाना हाईकोर्ट 10 महिला न्यायाधीशों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि केरल और पंजाब एंड हरियाणा के हाईकोर्ट 7 महिला न्यायाधीशों के साथ चौथे स्थान पर हैं।

इसके बावजूद जब तस्वीर का दूसरा पहलू देखते हैं तो स्थिति इतनी उत्साहजनक नहीं लगती, जबकि अधिकांश हाईकोर्ट ने बेंच में कम से कम एक महिला न्यायाधीश को समायोजित करने का प्रयास किया है। दुर्भाग्य से देश के 25 हाईकोर्ट में से पांच हाईकोर्ट में न्यायपालिका में कोई महिला प्रतिनिधित्व नहीं है।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि न्यायपालिका में महिलाओं की समान भागीदारी के समर्थकों के लिए आशा की एक झलक है, क्योंकि भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी के समर्थन में जोरदार वकालत कर रहे हैं।

सीजेआई ने सितंबर 2021 में घोषणा की थी कि महिलाओं को 50% आरक्षण की मांग दान के रूप में नहीं बल्कि अधिकार के रूप में करनी चाहिए। उन्होंने कुछ महीने बाद बेंच में विविधता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संकेत दिया कि वह इस मामले को कॉलेजियम के समक्ष उठाएंगे।

यह प्रवृत्ति न्यायपालिका में महिलाओं के पक्ष में देश में हाल ही में की गई पहलों में परिलक्षित होती है। हाल ही में कॉलेजियम की सिफारिशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक देखा गया है। पिछले साल दो और महिलाओं की नियुक्ति के साथ सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं की संख्या बढ़कर चार हो गई, जो अब तक का सबसे अधिक है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 8 मार्च को बड़े पैमाने पर पुरुष-प्रधान संस्था में महिलाओं के प्रवेश के विचार का जश्न मनाने के लिए पहली बार ‘महिला न्यायाधीशों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया।

केरल हाईकोर्ट ने भी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर केवल महिला न्यायाधीशों की एक पूर्ण पीठ का गठन करके इतिहास रचा था। कई न्यायाधीशों ने हाल के दिनों में उच्च न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने के पक्ष में अपने विचार व्यक्त किए हैं।

जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि ‘महिला न्यायाधीश न्यायिक प्रणाली को मान्य करती हैं और बड़ी संख्या में उनका समावेश संवैधानिक संहिताओं का एक स्पष्ट अहसास है।’

जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने कहा कि ‘महिलाओं को न्यायपालिका में भाग लेने से रोकने में लैंगिक रूढ़िवादिता मानदंड बड़ी भूमिका निभाते हैं। लैंगिक भेदभाव और महिला न्यायाधीशों के उत्पीड़न की भी शिकायतें हैं।’

उच्च न्यायपालिका में महिलाओं का समान प्रतिनिधित्व प्राप्त करने की राह कठिन हो सकती है लेकिन यह अब दूर की कौड़ी नहीं लगती। हाईकोर्ट में 713 न्यायाधीशों (13.18%) में से 94 महिला न्यायाधीश हैं। यह अप्रैल 2021 तक हाईकोर्ट के 661 न्यायाधीशों (लगभग 11%) में से 73 महिलाओं के आंकड़े से थोड़ा सुधार है।

देश के विभिन्न हाईकोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या :

मद्रास हाईकोर्ट – 13 (जस्टिस वीएम वेलुमणि, जस्टिस जे. निशा बानो, जस्टिस अनीता सुमंत, जस्टिस वी. भवानी सुब्बारॉयन, जस्टिस आर. थरानी, ​​जस्टिस आर. हेमलता, जस्टिस पीटीशा, जस्टिस एस. अनंती, जस्टिस एस. कन्नम्मल, जस्टिस आरएन मंजुला, जस्टिस टीवी थमिलसेल्वी, जस्टिस एस. श्रीमति , जस्टिस एन माला)

दिल्ली हाईकोर्ट – 11 (जस्टिस मुक्ता गुप्ता, जस्टिस अनु मल्होत्रा, जस्टिस रेखा पल्ली, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह, जस्टिस ज्योति सिंह, जस्टिस आशा मेनन, जस्टिस नीना बंसल कृष्णा, जस्टिस पूनम ए. बंबा, जस्टिस तारा वितस्ता गंजू, जस्टिस मिनी पुष्करना, जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा)

तेलंगाना हाईकोर्ट – 10 (जस्टिस जी श्री देवी, जस्टिस ललिता कन्नेगंती, जस्टिस पी श्री सुधा, जस्टिस डॉ. जस्टिस चिल्लाकुर सुमलता, जस्टिस जी. राधा रानी, जस्टिस ​​पी माधवी देवी, जस्टिस सुरेपल्ली नंदा, जस्टिस जुवाडी श्रीदेवी, जस्टिस गुन्नू अनुपमा चक्रवर्ती, जस्टिस मटुरी गिरिजा प्रियदर्शिनी)

केरल हाईकोर्ट – 7 (जस्टिस अनु शिवरामन, जस्टिस मैरी जोसेफ, जस्टिस शिरसी वी, जस्टिस एमआर अनीता, जस्टिस सोफी थॉमस, जस्टिस सीएस सुधा, जस्टिस शोबा अन्नम्मा ईपेन)

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट- 7 (जस्टिस रितु बाहरी, जस्टिस लिसा गिल, जस्टिस जयश्री ठाकुर, जस्टिस मंजरी नेहरू कौल, जस्टिस अलका सरीन, जस्टिस मीनाक्षी एल मेहता, जस्टिस अर्चना पुरी)

कर्नाटक हाईकोर्ट – 6 (जस्टिस एस.सुजाता, जस्टिस के.एस.मुदगल, जस्टिस ज्योति मुलिमणि, जस्टिस मक्कीमने गणेशैया उमा, जस्टिस जेएम खाजी, जस्टिस केएस हेमलेखा)

बॉम्बे हाईकोर्ट – 6 (जस्टिस साधना एस जाधव, जस्टिस रेवती मोहिते डेरे, जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई, जस्टिस भारती डांगरे, जस्टिस वीवी कंकनवाड़ी, जस्टिस एमएस जावलकर)

गुजरात हाईकोर्ट – 6 (जस्टिस एसजी गोकानी, जस्टिस संगीता के. विशन, जस्टिस गीता गोपी, जस्टिस वैभवी डी. नानावती, जस्टिस मौना एम. भट्ट, जस्टिस निशा एम. ठाकोर)

इलाहाबाद हाईकोर्ट – 5 (जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस संगीता चंद्रा, जस्टिस मंजू रानी चौहान, जस्टिस सरोज यादव, जस्टिस साधना रानी ठाकुर)

कलकत्ता हाईकोर्ट – 4 (जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य, जस्टिस शम्पा सरकार, जस्टिस अमृता सिन्हा, जस्टिस सुवरा घोष)

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट – 3 (जस्टिस जे. उमा देवी, जस्टिस के.विजय लक्ष्मी, जस्टिस ललिता कन्नेगंती)

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट – 3 (जस्टिस नंदिता दुबे, जस्टिस अंजुली पालो, जस्टिस सुनीता यादव)

गुवाहाटी हाईकोर्ट – 3 (जस्टिस रूमी कुमारी फुकन, जस्टिस मलाश्री नंदी, जस्टिस मरली वानकुंग)

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट – 2 (जस्टिस सबीना, जस्टिस ज्योत्सना रेवाल दुआ)

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट – 2 (जस्टिस सिंधु शर्मा, जस्टिस मोक्ष खजूरिया काज़मी)

उड़ीसा हाईकोर्ट -1 (जस्टिस सावित्री राठो)

राजस्थान हाईकोर्ट – 1 (जस्टिस रेखा बोराना)

सिक्किम हाईकोर्ट- 1 (जस्टिस मीनाक्षी मदन राय)

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट- 1 (जस्टिस रजनी दुबे)

झारखंड हाईकोर्ट -1 (जस्टिस अनुभा रावत चौधरी)

मणिपुर हाईकोर्ट – कोई नहीं

मेघालय हाईकोर्ट – कोई नहीं

पटना हाईकोर्ट- 27 न्यायाधीशों में से कोई नहीं

त्रिपुरा हाईकोर्ट – कोई नहीं

उत्तराखंड हाईकोर्ट – कोई नहीं

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