प्रधानाध्यापक की मेहनत से महकी स्कूल की बगिया, बदल गई सूरत

बेहतर शिक्षा से बड़ी छात्र संख्या, परिषदीय विद्यालय गदनिया बना बेस्ट स्कूल ऑफ द वीक

मनोज वर्मा

लखीमपुर खीरी (संज्ञान न्यूज़ डेस्क)। सकारात्मक विचारों के साथ यदि कोई प्रयास किया जाता है, तो उसमें सफलता भी मिलने लगती है। अमूमन शासकीय स्कूलों को लेकर आम लोगों में धारणा गलत ही रहती है, लेकिन पलिया ब्लॉक का परिषदीय विद्यालय गदनिया ऐसी तमाम धारणाओं समाप्त करते हुए एक नई मिशाल पेश की है। विद्यार्थियों को अच्छे मुकाम तक पहुंचाने के लिए स्कूल के शिक्षक आए दिन नवाचार करते रहते हैं। शिक्षकों के प्रयासों से विद्यालय में एक गार्डन बनाया गया। देखते ही देखते गार्डन के पेड़-पौधे विकसित होने लगे। हरी सब्जियों से लेकर औषधि, फल भी स्कूल में ही उगने लगे हैं, जिससे स्कूल में चलने वाला मेस के लिए मीनू के आधार पर बच्चों को स्कूल में उगने वाली सब्जियों ही खाने में दी जा रही हैं। नतीजा यह है कि गांव के लोग अब प्राइवेट स्कूल छोड़ सरकारी की ओर रूख कर रहे हैं। इस विद्यालय को बेस्ट स्कूल आफ द वीक के लिए चयनित किया गया।

ब्लॉक पलिया की ग्राम पंचायत गदनिया में स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह भी एक शासकीय स्कूल होगा। स्कूल में प्रवेश करते ही स्वच्छता अपने आप में विद्यालय की व्यवस्थाओं को दर्शाती हुई नजर आएगी। विद्यार्थियों के लिए विद्यालय में जो संसाधन और सुविधाएं मौजूद है, वे निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ रही हैं। विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था एवं हरे भरे बगीचे ने निजी स्कूलों को पछाड़ने का काम किया है। निजी स्कूलों के बच्चे भी इस विद्यालय में दाखिला लेने के लिए आतुर रहते हैं। विद्यालय में बच्चों के पीने के पानी के लिए आरओ एवं फ्रीजर लगा हुआ है। यहां पर दूर-दराज से बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आ रहे हैं।

विद्यालय रखवाली बनी चिंता, प्रधानाचार्य ने वेतन से रखा चौकीदार
खीरी के सुदूरवर्ती ब्लॉक पलिया के संपूर्णानगर रोड पर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के गदनिया के प्रधानाचार्य गौतम कुमार मिश्र बताते हैं कि विद्यालय आबादी से दूर होने के कारण रोपित पौधों व विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों एवं सामान को सुरक्षित रख पाना किसी चुनौती से कम न था। इसलिए उन्होंने अपने वेतन से तीन हजार के मासिक भुगतान पर एक चौकीदार रखा। जो न केवल विद्यालय की रखवाली करता है बल्कि उनके विद्यालय में रोपित पौधों को देखभाल, मिड डे मील के सामान सहित पूरे विद्यालय की सुरक्षा करता है।

बच्चे ले रहे आम, लीची सहित फल व सब्जियों का स्वाद
प्रधानाचार्य गौतम कुमार मिश्र ने इस विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में वर्ष 2006 व 2007 में विद्यालय में बरगद, पाकड़, आम, नींबू, बेल, लीची, कटहल सहित सहजन सहित करीब 20 पौध का रोपण किया, जो आज न केवल विद्यालय की शोभा बढ़ा रहे बल्कि बच्चों को फल एवं सब्जी का आनंद भी दे रहे। यही नहीं विद्यालय में बनने वाले एमडीएम में कटहल का भी उपयोग किया जा रहा। बच्चे इन दिनों आम, लीची, नींबू व आंवले का भी आनंद ले रहे।

स्मार्ट क्लास बने आकर्षण का केंद्र
अभिभावक-शिक्षक संघ भी एक बेहतर भूमिका में विद्यालय को सहयोग प्रदान कर बच्चों को स्कूल से जोड़ने का कार्य कर रहा। डिजिटल-स्मार्ट क्लास रूम भी बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा और उसका लाभ भी प्राप्त कर रहे।आकर्षक पुस्तकालय कक्ष एवं इनडोर-आउट डोर क्रीड़ा- सामग्री बच्चों के विकास में सहायक सिद्ध हो रही। यहां पर बच्चे पर्यावरण संरक्षण का संदेश बड़ी ही सहजता से सीख रहे।

बच्चों का बढ़ा लगाव: बदलते परिवेश को देखते हुए बच्चों का लगाव विद्यालय से बढ़ने लगा। बच्चों की दैनिक उपस्थिति में बढ़ोतरी होने लगी। बेहतर ड्रेस के साथ विद्यालय आने में बच्चों को आनंद आने लगा। बच्चों के मानसिक स्तर में भी परिवर्तन देखने को मिला। बच्चों में स्वस्थ प्रतियोगी भावना विकसित हुई जिससे उनके प्रदर्शन में भी निखार आया।

शैक्षिक स्तर हुआ बेहतर: विद्यालय का शैक्षिक स्तर गत वर्षों की तुलना में काफी बेहतर हुआ है। कई बच्चे अंग्रेजी में प्रजेंटेशन भी देने में सक्षम बने हैं। इसके अलावा, अधिकांश बच्चे अपने कक्षा स्तर से संबंधित पाठ्यक्रम की जानकारी रखते हैं व उनसे संबंधित प्रश्नों का उत्तर देते हैं। प्रधानाध्यापक ने सहायक स्टाफ के साथ मिलकर पांच वर्षों में पूरे परिवेश को बदलकर रख दिया। स्वच्छता पर दिया खास ध्यान: विद्यालय की भौतिक स्वच्छता व बच्चों की व्यक्तिगत स्वच्छता पर विद्यालय में विशेष ध्यान दिया। बच्चों को प्रतिदिन स्वच्छता के साथ विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यालय में भी साफ-सफाई रखने पर जोर दिया गया।

साप्ताहिक गतिविधियों का आयोजन: विद्यालय में बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए साप्ताहिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कराकर बच्चों में रचनात्मकता विकसित करने के प्रयास किए जाते हैं।

विद्यालय के विकास में पीटीएम (पैरेंट्स टीचर मीटिंग) की भी खास भूमिका रही। इसके जरिए जहां विद्यार्थियों की बेहतरी के लिए अभिभावकों से सुझाव लेने का अवसर मिला, वहीं बच्चों की कमियों को मिलकर दूर करने में सफलता भी मिली। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि बच्चे कॉन्वेंट स्कूलों से कमतर ना रहे। गौतम कुमार मिश्र प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गदनिया

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