भगवान करे कि कोरोना की नई लहर ना ही आए… धनबाद से वापस लौट गए लैब टेक्नीशियन और कर्मचारी

 धनबाद: धनबाद को अब अगर कोरोना के किसी नए खतरे से कोई बचा सकता है तो वह खुद भगवान ही हैं। लोग क्‍या, अब तो स्‍वास्‍थ्‍य विभाग खुद भी मना रहा है कि कोरोना की कोई लहर ना ही आए। संक्रमण से लड़ने के लिए विभाग की तैयारी इसका सबूत दे रही है।

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के संक्रमण के दौरान मुख्यालय रांची की ओर से धनबाद भेजा गए आरटी पीसीआर वाहन अब बेकार पड़ा है। वाहन में काम कर रहे लगभग एक दर्जन लैब टेक्नीशियन और कर्मचारी दिल्ली लौट गए हैं। कर्मचारियों के चले जाने के बाद वाहन सदर अस्पताल के मुख्य गेट पर खड़ा कर दिया गया है। ऐसे में इस वाहन का ना तो मेंटेनेंस हो पा रहा है और ना ही इसका किसी तरह से लाभ लिया जा रहा है। लगभग 70 लाख का वाहन बस विभाग की शोभा बढ़ा रहा है।

धनबाद को अब अगर कोरोना के किसी नए खतरे से कोई बचा सकता है तो वह खुद भगवान ही हैं। लोग क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य विभाग खुद भी मना रहा है कि कोरोना की कोई लहर ना ही आए। संक्रमण से लड़ने के लिए विभाग की तैयारी इसका सबूत दे रही है।

रैपिड किट से हो रही कोरोना जांच, आरटी पीसीआर पर ध्‍यान नहीं: कोरोना वायरस की संभावित चौथी लहर की आशंका के बावजूद स्वास्थ्य विभाग कागज पर ही अलर्ट जारी कर रहा है। यही वजह है कि अलर्ट के बावजूद जिले में सरकारी अस्पतालों में आरटी पीसीआर जांच नाममात्र की हो रही है। रेलवे स्टेशन पर मुंबई और दिल्ली से आने वाले यात्रियों की केवल एंटीजन रैपिड किट से जांच हो रही है, जबकि मुख्यालय की ओर से आदेश जारी कर अधिक से अधिक आरटी पीसीआर जांच करने को कहा गया था। अब ऐसे में वाहन से काम नहीं लिया जा रहा है, जबकि बरसात में लाखों रुपये की लागत से तैयार यह वाहन खराब भी हो सकता है।

मुख्यालय को दी जा रही सूचना: इस संबंध में जिला महामारी रोग नियंत्रण विभाग के पदाधिकारी डॉक्टर राजकुमार सिंह ने बताया कि वाहन को लेकर मुख्यालय को सूचना दी जा रही है। साथ ही जिला प्रशासन को भी सूचित किया गया है। उन्‍होंने कहा कि आगे के निर्देशों का पालन किया जाएगा। बताया कि फिलहाल अस्पताल में सैंपल लेने की व्यवस्था की गई है। मरीजों की स्थिति को देखते हुए रैपिड किट से ही जांच हो रही है।

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