टारगेट किलिंग को अंजाम देने वालों की पहचान करना बना टेढ़ी खीर… कश्‍मीर में साजिश का प्‍लान समझिए

कश्‍मीर फिर हिंदुओं के खून से लहूलुहान है। सिलसिलेवार हत्‍याओं ने 1990 के जख्‍म हरे कर दिए हैं। चुनचुनकर हिंदुओं के खून से होली खेली जा रही है। विजय कुमार, रजनी बाला, राहुल भट्ट जैसों को आतंकी दिनदहाड़े मारकर चल जाते हैं। मकसद सिर्फ यह खौफ भर देना है कि गैर-मुस्लिमों, बाहरियों और उनके हमदर्दों के लिए कश्‍मीर में जगह नहीं है। असर दिखने भी लगा है। बड़ी संख्‍या में कश्‍मीरी हिंदुओं ने पलायन शुरू कर दिया है। आखिर कौन हैं ये आतंकी जो इतनी आसानी से इन वारदातों को अंजाम दे देते हैं? क्‍यों इनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है? दरअसल, सरकार के पास भी इन सवालों के सटीक जवाब नहीं हैं। उसके सामने पहली बार एक अलग तरह की चुनौती खड़ी हो गई है। आतंकियों ने आतंक फैलाने के लिए अपना चेहरा बदल लिया है। अब ये ‘हाइब्रिड टेररिस्‍ट’ (Hybrid Terrorists) का मुखौटा लगाकर दहशत फैलाने की साजिश को अंजाम दे रहे हैं।

एक मई से कश्‍मीर में 9 लोगों की टारगेट किलिंग हुई है। इनमें से तीन पुलिसकर्मी थे और 6 निर्दोष नागरिक। गुरुवार को आतंकियों ने बैंक मैनेजर विजय कुमार की हत्‍या कर दी। वह राजस्‍थान के रहने वाले थे। इसी दिन बिहार के एक मजदूर की भी निर्मम हत्‍या हुई। इसके पहले मंगलवार को स्‍कूल में टीचर रजनी बाला की आतंकियों ने हत्‍या कर दी थी। टारगेट किलिंग की इन सिलसिलेवार घटनाओं ने सरकार की टेंशन बढ़ा दी है।

गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और खुफिया एजेंसी रॉ (रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग) के प्रमुख सामंत गोयल के साथ बैठक की थी। यह बैठक करीब एक घंटे तक चली थी। सिलसिलेवार टारगेट किलिंग के बीच शुक्रवार को भी शाह ने जम्मू कश्मीर की सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया। इस बैठक में अजीत डोभाल, सेना प्रमुख मनोज पांडे और जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा शामिल थे।

आतंकियों ने बदल दी है स्‍ट्रैटेजी…
इस तरह की खबरें हैं कि प्रशासन के सामने हत्‍याओं को अंजाम देने वालों की पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसकी वजह यह है कि दहशत फैलाने वाले आतंकियों ने अपनी स्‍ट्रैटेजी बदल दी है। अब कश्‍मीर में हिंदुओं में खौफ पैदा करने के लिए पाकिस्‍तान से एके-47 भेजने का बहुत जोखिम नहीं लिया जा रहा है। अलबत्‍ता, कश्‍मीरी युवाओं को ही उकसाकर उनके हाथों में पिस्‍टल थमाई जा रही हैं। अक्‍सर थोड़े से पैसे या ड्रग्‍स का लालच देकर इनसे हत्‍याओं को अंजाम दिलाया जाता है।

क्‍यों है इन आतंकियों के बारे में पता लगाना मुश्किल
इन हाइब्रिड टेररिस्‍टों के बारें में पता लगाना इसलिए मुश्किल है क्‍योंकि इनका अपराध का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं होता है। ये हथियार चलाने की मामूली ट्रेनिंग लेकर वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके लिए अमूमन ऐसे कश्‍मीरी युवाओं को ही चुना जाता है जिनका अपराध की ओर झुकाव होता है। इन्‍हें उकसाकर और मामूली पैसों का लालच देकर निर्दोषों की हत्‍या करने के लिए तैयार कर लिया जाता है। हमला करने के बाद ये बड़ी आसानी से दोबारा भीड़ का हिस्‍सा बन जाते हैं।

इसके पीछे का प्‍लान समझिए…
यह पाकिस्तान में बैठे इन आतंकियों के आकाओं के लिए बहुत मददगार है। वो आसानी से इन आतंकी वारदातों की जिम्‍मेदारी लेने से मुकर सकते हैं। यह पाकिस्‍तान को मौका देता है कि वह इसे कश्‍मीरियों का विद्रोह बताकर अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर पल्‍ला झाड़ ले। यानी पाकिस्‍तान और उसके आंगन में पलने वाले आतंकियों दोनों के लिए यह विन-विन सिचुएशन है। इस स्‍ट्रैटेजी को अपनाकर पाकिस्‍तान कश्‍मीर में आग सुलगाए रखने के साथ आसानी से अपना दामन दागदार होने से बचा सकता है। वहीं, सच यह है कि पाकिस्‍तान सीमा पार से हर दिन पिस्‍टलों का कंसाइनमेंट भेज रहा है। इनमें कई पकड़े गए हैं। हालांकि, कई हाइब्रिड टेररिस्‍टों के हाथों तक पहुंच जाते हैं।

कैसे अपने मंसूबों में सफल हो रहे आतंकी?
अकेले इस साल 9 पुलिसकर्मी इन आतंकियों का निशाना बन चुके हैं। वहीं, 2021 में 20 ने जान गंवाई थी। जिन कैंपों में माइग्रेंट वर्कर रहते हैं वहां सुरक्षा के लिए इंतजाम किए गए हैं। लेकिन, बिगड़ते माहौल को देखकर वो कश्‍मीर छोड़कर अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। ज्‍यादातर लोगों को आतंकियों ने उस वक्‍त टारगेट बनाया जब वो या तो अपने काम पर जा रहे थे या काम करके लौट रहे थे। इस तरह आतंकी अपने मंसूबों में सफल होते दिख रहे हैं। वो यही चाहते हैं।

क्‍या है इस चुनौती का हल?
हाइब्रिड टेररिस्‍टों की पहचान फूस के ढेर में सुई खोजने से कम नहीं है। हालांकि, प्रशासन का मानना है कि इसमें पुलिस फोर्स बड़ी भूमिका निभा सकती है। प्रशासन स्‍थानीय पुलिस कर्मियों को तैयार करेगा कि वे छोटे-मोटे अपराध करने वालों पर नजर रखें। उनकी भी पहचान की जाए जिनका व्‍यवहार असामाजिक है और जिनका रुझान आपराधिक गतिविधियों की तरफ है।

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