अयोध्या में खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही सरयू,नदी में बह गई चिता जलाने के लिए रखी लकड़ियां

संतोष मौर्य


अयोध्या – भगवान श्री राम की जन्मस्थली में मोछ दायिनी मां सरयू नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है. सरयू का रौद्र रूप इस तरह से है कि रामनगरी के श्मशान घाट को भी उसने अपनी आगोश में ले लिया. इतना ही नहीं श्मशान घाट पर स्थित लकड़ी और अंतिम क्रिया के सामानों की दुकान करने वाले लोगों को इतना भी मौका नहीं मिला कि वे अपना सामान हटा सकें.सरयू का जल खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है.

ऐसे में सरयू के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ ने दस्तक दे दी है. रामनगरी में सबसे विकट समस्या लोगों के अंतिम संस्कार की खड़ी हो गई है. सरयू के घाट पर स्थित श्मशान घाट पूर्ण रूप से जलमग्न हो गया है. ऐसे में लोग घाटों की सीढ़ियों पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं.

लेकिन समस्या इतनी विकट है कि जाएं तो जाएं कहां, क्योंकि दूरदराज से लोग अपने प्रियजनों के शव का अंतिम संस्कार के लिए सरयू नदी पहुंच रहे हैं. इधर, श्मशान घाट जलमग्न है.निशुल्क लकड़ी बैंक का संचालन करने वाले रितेश मिश्रा ने बताया कि रातों रात सरयू का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ा, जिसकी वजह से स्थानीय दुकानदारों को लकड़ी और अन्य सामान उठाने का मौका ही नहीं मिला. रात में जब दुकान बंद की थी तो उस समय सरयू का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था, पर सुबह सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया था।

रितेश मिश्रा ने बताया कि रामाय सेवा ट्रस्ट के द्वारा निशुल्क लकड़ी बैंक चलाया जाता है. जहां से गरीब और लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं. हमारे अलावा आठ लकड़ी व्यवसाई जो श्मशान घाट पर लकड़ी बेचते थे उन सब लोगों की 50 हजार की लकड़ियां सरयू में बह गई हैं. इसके अलावा श्मशान घाट पर चाय और छोटी मोटी दुकान करके अपनी जीविका चलाने वाले लोगों को इतना भी मौका नहीं मिला कि वे अपनी दुकान है या सामान हटा सकें।

Leave a Reply

%d bloggers like this: