श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग द्वारा एक दिवसीय संगोष्ठी द्वारा आयोजन हुआ – अतुल सचदेवा सीनियर जर्नलिस्ट

नई दिल्ली – बदलते समय में हिंदी के नए क्षितिज की संभावनाओं और चुनौतियों पर एक सारगर्भित चर्चा आज श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग द्वारा आयोजित करवाई गई। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर आयोजित इस संगोष्ठी में प्रमुख भाषाविद् डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा, राजकमल प्रकाशन समूह के कार्यकारी निदेशक आमोद माहेश्वरी प्रमुख वक्ता रहे। जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के संकाय अध्यक्ष प्रो. अनिल राय ने अध्यक्षीय दायित्व निभाया।
हिंदी के नए क्षितिज: अवसर एवं चुनौतियाँ विषय पर प्रमुख वक्ता डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा ने राजभाषा हिंदी के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए हिंदी को अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के साथ मिल कर आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने हिंदी के विद्यार्थियों के लिए ‘हिंदी प्लस’ का फार्मूला अपनाने को कहा। हिंदी प्लस में उन्होंने डिजिटल तकनीक, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं के ज्ञान को अपनाने की बात कही।


कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जसविंदर सिंह ने नई शिक्षा समिति के संदर्भ मातृ भाषा और भारतीय भाषाओं के महत्व को स्थापित किया।उन्होंने हिंदी और पंजाबी भाषा की परस्परता पर जोर दिया जबकि राजकमल प्रकाशन समूह के कार्यकारी निदेशक आमोद माहेश्वरी ने हिंदी के विश्वव्यापी अभूतपूर्व विस्तार पर प्रकाश डालते हुए प्रकाशन उद्योग में हिंदी की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. स्मिता मिश्र ने हिंदी के वैश्विक विस्तार के कारण उत्पन्न अवसरों पर जहां प्रसन्नता अभिव्यक्त करते हुए भाषाई अस्मिता के दांव पर लगने पर भी चिंता जाहिर की।


कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. अनिल राय ने वैश्विक हिंदी विस्तार पर बात करते हुए पारिभाषिक शब्दावली को सहज बनाने पर भी जोर दिया और हिंदी पढ़ने वाले विधार्थियों को हिंदी पढ़ने पर गर्व महसूस करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन विभाग प्रभारी डॉ. सुमिता लोहिया ने किया। धन्यवाद ज्ञापन विभाग प्राध्यापक मनीष शुक्ल ने किया।

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