चांपी दोहरे हत्याकांड का खुलासा, शेरघाटी पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार,

अवैध प्रेम प्रसंग मे हुई थी हत्या
अंकित राज सहायक ब्यूरो
शेरघाटी ( संज्ञान न्यूज)। पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर पुलिस चाह ले, तो अपराधी ज्यादा दिनों तक कानून से बच नहीं सकते। चांपी कांड के दोहरे हत्याकांड में शेरघाटी पुलिस ने जिस तेजी और सूझबूझ से खुलासा किया है, वह काबिले-तारीफ है। इस जघन्य वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन पुलिस की तत्पर कार्रवाई से अब सच्चाई सबके सामने आ चुकी है।
यह मामला मृतक प्रदीप यादव से जुड़ा है। पुलिस जांच में सामने आया कि प्रदीप यादव का अवैध संबंध मनोज मांझी की पत्नी के साथ था। इसी बात को लेकर मनोज मांझी के मन में लंबे समय से गुस्सा और नफरत भरी हुई थी। कई बार इसको लेकर विवाद भी हुआ, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। इसी रंजिश ने धीरे-धीरे एक खौफनाक साजिश का रूप ले लिया।
पुलिस के अनुसार, मनोज मांझी ने अपने साथी रघुनी मांझी के साथ मिलकर प्रदीप यादव को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। घटना की रात प्रदीप यादव और उनकी पत्नी केशरी देवी, जो कि चांपी पंचायत की वार्ड सदस्य थीं, दोनों एक ही खलिहान में सो रहे थे। अपराधियों को पहले से इसकी जानकारी थी।
रात के अंधेरे में मनोज मांझी और रघुनी मांझी ने धारदार हथियार से प्रदीप यादव की गला रेतकर हत्या कर दी। लेकिन यहीं पर मामला खत्म नहीं हुआ। अपराधियों को यह डर था कि अगर सिर्फ प्रदीप यादव की हत्या की गई और उनकी पत्नी केशरी देवी को जिंदा छोड़ दिया गया, तो वह पूरे मामले का खुलासा कर सकती हैं और अपराधियों की पहचान सामने आ सकती है।
इसी डर और अपनी सच्चाई छिपाने के लिए अपराधियों ने वार्ड सदस्य केशरी देवी की भी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद दोनों शवों को एक ही चिता पर रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया गया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें और मामला दुर्घटना या रहस्यमय मौत जैसा लगे।
घटना की सूचना मिलते ही शेरघाटी पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया, साक्ष्य जुटाए और परिजनों से पूछताछ शुरू की। शुरुआती जांच में मामला बेहद पेचीदा लग रहा था, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी।
शेरघाटी थाना प्रभारी मोहन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। सर्किल इंस्पेक्टर इम्तेयाज अहमद ने तकनीकी जांच को मजबूत किया। सब-इंस्पेक्टर रूपा कुमारी और सब-इंस्पेक्टर शिवशंकर साह ने गांव में लगातार पूछताछ कर अहम सुराग जुटाए। मोबाइल कॉल डिटेल, आपसी संबंध और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस सच्चाई तक पहुंची।
आखिरकार पुलिस ने मनोज मांझी और रघुनी मांझी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। हत्या में इस्तेमाल हथियार और अन्य सबूत भी पुलिस ने बरामद कर लिए।

शेरघाटी पुलिस की इस तेज और सटीक कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि अपराध चाहे जितना भी शातिर क्यों न हो, पुलिस की नजर से बच नहीं सकता। आम लोगों में पुलिस के प्रति भरोसा और मजबूत हुआ है।
इस पूरे मामले में शेरघाटी पुलिस प्रशासन की जितनी सराहना की जाए, उतनी कम है। पुलिस ने न सिर्फ अपराधियों को जल्द गिरफ्तार किया, बल्कि एक निर्दोष महिला जनप्रतिनिधि को न्याय दिलाने का भी काम किया है। यह कार्रवाई आने वाले समय में अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून से खेलना भारी पड़ सकता है।




